झिक बिजुरी पंचायत में लग रहे बिलों पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने जांच की मांग
बिना फर्म व रजिस्ट्रेशन के नामों से बिल लगाए जाने का दावा, लाखों के भुगतान को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
जिले के अंतिम छोर पर स्थित जनपद पंचायत बुढार अंतर्गत ग्राम पंचायत झिक बिजुरी इन दिनों पंचायत में लगाए जा रहे विभिन्न बिलों को लेकर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में अलग-अलग नामों से ऐसे बिल लगाए जा रहे हैं, जिनकी फर्म, पंजीयन और वैधता को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ रही है।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में गिट्टी, छड़ सहित निर्माण सामग्री के नाम पर लाखों रुपये के बिल लगाए जाने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिन फर्मों या व्यक्तियों के नाम से ये बिल लगाए जा रहे हैं, क्या वे विधिवत पंजीकृत हैं? क्या उनके पास संबंधित सामग्री की आपूर्ति करने का वैध दस्तावेज और आवश्यक पंजीयन है? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या इन बिलों के आधार पर किए जा रहे भुगतान शासन के नियमों के अनुरूप हैं?
बिलों की जांच की उठी मांग
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में शासकीय राशि के उपयोग में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। यदि किसी सामग्री की वास्तविक खरीदी हुई है तो उसके बिल, फर्म का पंजीयन, जीएसटी विवरण, सप्लाई रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और भुगतान संबंधी दस्तावेज जांच के दौरान सामने आने चाहिए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत में हाल के समय में लगाए गए सभी बिलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि कितने बिल नियमों के तहत लगाए गए और कितने बिलों में अनियमितता है।
शासकीय राशि के उपयोग पर उठ रहे सवाल
ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए शासन से मिलने वाली राशि जनता की सुविधा और विकास कार्यों पर खर्च की जाती है। ऐसे में यदि बिलों की वैधता को लेकर सवाल उठते हैं तो संबंधित विभाग द्वारा दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है।
अब देखना होगा कि झिक बिजुरी ग्राम पंचायत में लगाए जा रहे कथित संदिग्ध बिलों की जांच कब शुरू होती है और जांच में वास्तविकता क्या सामने आती है। ग्रामीणों ने जनपद पंचायत बुढार एवं संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है
नोट: बिलों की वास्तविक वैधता और किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों एवं विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।


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