आखिरकार काबू में आया खूंखार हाथी “E-5”, 10 दिन चले हाईटेक रेस्क्यू ऑपरेशन में वन विभाग को मिली बड़ी सफलता
वन परिक्षेत्र केशवाही एवं आसपास के क्षेत्रों में विगत कुछ दिनों से विचरण कर रहे जंगली नर हाथी "E-5" द्वारा मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाएँ सामने आ रही थीं। हाथी के आबादी क्षेत्रों के समीप आने से ग्रामीणों में भय की स्थिति निर्मित हो गई थी। हाथी के शहडोल की सीमा में प्रवेश करने से पहले कुछ दिन तक अनूपपुर में विचरण करने के दौरान वन विभाग द्वारा क्षेत्र में विशेष सतर्कता एवं निगरानी व्यवस्था प्रारंभ की गई। वन विभाग द्वारा लगातार ग्रामीणों को गश्ती, मुनादी लाउडस्पीकर एवं बैठकों के माध्यम से सतर्क किया गया तथा हाथी के मूवमेंट वाले क्षेत्रों में रात्रिकालीन गश्त, निगरानी एवं जन-जागरूकता अभियान संचालित किया गया। संवेदनशील ग्रामों में ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर रहने हेतु समझाइश दी गई तथा हाथी मित्र दल एवं वन अमले द्वारा निरंतर संपर्क बनाए रखा गया। क्षेत्र में हाथी की गतिविधियों की निगरानी ड्रोन एवं अन्य माध्यमों से भी की जाती रही। कई गांवो ने कच्चे मकान खाली भी करवाये गए।
दिनांक 13 मई 2026 को ग्राम गिरवा क्षेत्र में एक ग्रामीण की मृत्यु की घटना के पश्चात स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश की मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, मध्य प्रदेश डॉ समिता राजौरा द्वारा एलीफेंट एडवाइजरी कमेटी एवं फील्ड अधिकारियों की एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई गई एवं रेस्क्यू की रणनीति तैयार की गई। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से प्रशिक्षित हाथियों, महावतों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों के दल को बुलाया गया एवं वन वृत्त शैडो के स्थानीय अमले के साथ एक संयुक्त रेस्क्यू दल का गठन किया गया। प्रशिक्षित हाथियों का एक ट्रांजिट कैम्प ग्राम बेलिया में स्थापित किया गया एवं जिला प्रशासन के सहयोग से समस्त क्षेत्र को सुरक्षा की दृष्टि से कॉर्डन ऑफ किया गया। साथ ही ग्राम बेलिया के शासकीय विद्यालय में एक मॉनिटरिंग स्टेशन तथा वनमंडल दक्षिण शहडोल में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया जहाँ से पूरे घटनाक्रम की सतत निगरानी की गई। कई दिनों तक लगातार मॉनिटरिंग एवं रणनीतिक प्रयासों तथा दो दिन तक चले इस जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दिनांक 23 मई 2026 को हाथी "E-5" का सफल एवं सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।
रेस्क्यू अभियान अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संचालित किया गया। जिसमे कई जेसीबी मशीनें, क्रेन, ट्रक, टैंकर, फायर टेंडर, ट्रेक्टर, थर्मल एवं इंफ्रारेड ड्रोन इत्यादि का इस्तेमाल किया गया। किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय दुर्घटना की आशंका के मद्देनज़र स्वास्थ्य विभाग से डॉ चित्रलेखा सिंह एवं एम्बुलेंस पूरे ऑपरेशन के दौरान तैनात रही। घने वनक्षेत्र, पहाड़ी भूभाग एवं हाथी के आक्रामक व्यवहार के बावजूद वन वृत्त शहडोल एवं बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के संयुक्त रेस्क्यू दल ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए पूरे अभियान को सफल बनाया। अभियान के दौरान हाथी की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा गया तथा आवश्यक चिकित्सकीय निगरानी निरंतर जारी रही।
रेस्क्यू उपरांत हाथी को सुरक्षित रूप से बांधवगढ़ क्षेत्र के उपयुक्त प्राकृतिक आवास हेतु रवाना किया गया, जहाँ उसकी सतत निगरानी की जाएगी।
इस संपूर्ण अभियान में वन वृत्त स्तर से लेकर मैदानी अमले तक सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूरा अभियान बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर श्री अनुपम सहाय तथा वन वृत्त शहडोल के वन संरक्षक श्री महेंद्र प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। वनमंडलाधिकारी दक्षिण शहडोल तरुण वर्मा एवं वनमंडलाधिकारी अनूपपुर डेविड चनाप के निर्देशन में उपवनमण्डलाधिकारी जैतपुर विनोद जाखड़, भा.व.से. द्वारा इस ऑपरेशन का नेतृत्व किया गया जिसमे परिक्षेत्र अधिकारी केशवाही अंकुर
तिवारी एवं उनकी टीम द्वारा द्वारा पूरे अभियान के दौरान मैदानी स्तर पर बीटीआर की रेस्क्यू टीम के साथ सतत समन्वय कर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
उक्त कार्यवाही में उपवनमंडलाधिकारी अनूपपुर प्रीतेश पखाले, सोहागपुर संतोष शुक्ला, सहायक संचालक बीटीआर दिलीप मराठा, वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. श्री राजेश तोमर, डॉ. अभय सेंगर, डॉ. अमोल रोखड़े एवं डॉ. नितिन गुप्ता, वन परिक्षेत्राधिकारी गोहपारू हेमन्त प्रजापति, वन परिक्षेत्राधिकारी खन्नौधी भाग्यशाली सिंह, वन परिक्षेत्राधिकारी जैतपुर ब्रजलाल प्रजापति, वन परिक्षेत्राधिकारी बुढ़ार सलीम खान, वन परिक्षेत्राधिकारी जयसिंहनगर दिनेश पटेल वनक्षेत्रपाल, वन परिक्षेत्राधिकारी अनूपपुर स्वर्णगौरव सिंह वनक्षेत्रपाल, वन परिक्षेत्राधिकारी जैतहरी विवेक मिश्रा वनक्षेत्रपाल, अमित सिंह चंदेल प्रशिक्षु वनक्षेत्रपाल, प्रज्ञा गुप्ता प्रशिक्षु वनक्षेत्रपाल, बृजभान सिंह उप वनक्षेत्रपाल, बेदन सिंह कार्यवाहक वनपाल, वीरभान सिंह कार्यवाहक वनपाल, श्री बृजेश तिवारी वनरक्षक, श्री धीरेन्द्र गौतम वनरक्षक, श्री अभिनय गौतम वनरक्षक, श्री राहुल शर्मा वनरक्षक एवं अन्य समस्त वन स्टाफ की महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही। साथ ही इस अभियान में जिला कलेक्टर श्री केदार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव एवं समस्त प्रशासनिक अमले का भी सराहनीय योगदान रहा।
वन विभाग वन्यप्राणियों एवं स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर है एवं स्थानीय नागरिकों से अपील करता है कि वन्यजीवों के संबंध में किसी भी प्रकार की सूचना तत्काल निकटतम वन अमले को दें तथा अफवाहों से बचते हुए विभागीय निर्देशों का पालन करें। मानव एवं वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।


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