Header Ads Widget

एसईसीएल प्रबंधन की तानाशाही से किसान परेशान जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से लगाई गुहार

 एसईसीएल प्रबंधन की तानाशाही से किसान परेशान जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से लगाई गुहार



रामपुर बटुरा सोहागपुर क्षेत्र। एसईसीएल प्रबंधन की कार्रवाई से प्रभावित किसान और ग्रामीण इन दिनों भारी चिंता और असुरक्षा के माहौल में जीवन बिता रहे हैं। किसानों का आरोप है कि प्रबंधन द्वारा मकानों को खाली कराने और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जबकि वर्तमान समय में बरसात का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में यदि मकान गिरा दिए जाते हैं तो प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो जाएंगे।


ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से अपने घर बनाए हैं और बरसात के दौरान उन्हें तोड़ना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं है। किसानों ने आरोप लगाया कि एसईसीएल प्रबंधन उनकी समस्याओं और परिस्थितियों को नजरअंदाज करते हुए एकतरफा कार्रवाई कर रहा है, जिससे लोगों में आक्रोश और भय का माहौल है।


प्रभावित किसानों ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सदस्य जिला पंचायत श्रीमती शांति मनमोहन चौधरी जनपद सदस्य श्री चंद कुमार तिवारी सरपंच श्रीमती परेमिया बैगा झोले बैगा पूर्व सरपंच को लिखित शिकायत करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता भूपेश शर्मा की उपस्थिति में उनके द्वारा लोकप्रिय महाप्रबंधक महोदय एवं अनुभाग्य दंडाधिकारी सुहागपुर को तत्काल निवेदन किया गया ग्रामीणों के इस निवेदन पर अधिक शीघ्र विचार करते हुए बरसात तक किसी भी मकान को एचएस ना किया जाए बल्कि इस बरसात के अंदर संपूर्ण मकान का मुआवजा एवं पुनर्वास आईएनआर सहित सभी प्रक्रिया को पूरा किया जाएप्रतिलिपि में प्रबंधन और प्रशासन को निवेदन किया जिला प्रशासनऔर संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि वे तत्काल हस्तक्षेप करें और बरसात समाप्त होने तक किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि यदि अभी मकान तोड़े गए तो छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं सहित कई परिवारों के सामने रहने और जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।


ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित किए बिना किसी भी प्रकार की मकठोर कार्रवाई न की जाए। किसानों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनके अधिकारों और मानवीय संवेदनाओं का भी सम्मान किया जाना चाहिए।


ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल क्षेत्र के लोगों की निगाहें जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं। किसानों को उम्मीद है कि उनकी समस्याओं को समझते हुए बरसात के मौसम तक उनके मकानों को सुरक्षित रखा जाएगा और उनके हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।यदि चाहें, मैं इसे स्थानीय अखबार की शैली में अधिक प्रभावशाली शीर्षक और उपशीर्षक के साथ भी तैयार कर सकता हूँ।

Post a Comment

0 Comments