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केसवाही के बाजार में आवारा मवेशियों का जमघट, राहगीरों और व्यापारियों के लिए बने मुसीबत सड़क के बीच डेरा, किसानों की फसल चौपट और बाजार में दुकानदारों के सामान को नुकसान का आरोप—बड़ी गौशाला के बावजूद व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

 केसवाही के बाजार में आवारा मवेशियों का जमघट, राहगीरों और व्यापारियों के लिए बने मुसीबत


सड़क के बीच डेरा, किसानों की फसल चौपट और बाजार में दुकानदारों के सामान को नुकसान का आरोप—बड़ी गौशाला के बावजूद व्यवस्था पर उठ रहे सवाल


केसवाही/शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के जनपद पंचायत बुढार अंतर्गत ग्राम पंचायत केसवाही में इन दिनों आवारा मवेशियों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। मुख्य बाजार एवं आसपास के मार्गों पर बड़ी संख्या में आवारा मवेशी जगह-जगह झुंड बनाकर बैठे और घूमते नजर आ रहे हैं। हालात यह हैं कि कई बार मवेशी सड़क के बीचों-बीच बैठ जाते हैं, जिसके कारण राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सड़क पर बैठे मवेशी, दुर्घटना का बढ़ा खतरा

स्थानीय लोगों के मुताबिक सुबह से लेकर देर शाम तक आवारा मवेशी बाजार एवं मुख्य मार्गों पर घूमते रहते हैं। कई मवेशी अचानक सड़क पर आ जाते हैं तो कई बीच सड़क पर ही बैठ जाते हैं। ऐसे में वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति अधिक चिंताजनक बताई जा रही है। यदि कोई वाहन चालक अचानक सड़क पर बैठे मवेशी से बचने का प्रयास करता है तो सामने से आने वाले वाहन से टक्कर होने का खतरा बना रहता है।

दिन में किसानों की फसल, शाम को बाजार में डेरा

स्थानीय स्तर पर यह भी शिकायत सामने आ रही है कि यही आवारा मवेशी दिन के समय खेतों में पहुंचकर किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और शाम होते ही बाजारों में आकर सड़क एवं दुकानों के आसपास डेरा जमा लेते हैं।

इससे किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती है तो बाजार के व्यापारियों और ग्राहकों के सामने आवारा मवेशियों से निपटने की समस्या खड़ी हो गई है।

व्यापारियों में नाराजगी, सामान नुकसान होने की शिकायत

मुख्य बाजार में मवेशियों के घूमने और दुकानों के आसपास जमघट लगाने से व्यापारियों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। बताया जा रहा है कि कई बार मवेशियों की वजह से दुकानों के बाहर रखा सामान क्षतिग्रस्त होने की स्थिति बन जाती है।

व्यापारियों का सवाल है कि यदि किसी दुकानदार के सामान को आवारा मवेशियों के कारण नुकसान पहुंचता है या किसी ग्राहक अथवा राहगीर के साथ दुर्घटना होती है, तो उस नुकसान की भरपाई कौन करेगा और इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

केसवाही में बड़ी गौशाला, फिर भी बाजारों में क्यों घूम रहे मवेशी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा केसवाही में मवेशियों के लिए बड़ी गौशाला का निर्माण कराया गया है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में मवेशी खुलेआम बाजार और सड़कों पर घूमते नजर आ रहे हैं।

यदि शासन द्वारा गौशाला में मवेशियों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, तो फिर आवारा मवेशियों को गौशाला तक पहुंचाने की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है? क्या गौशाला में पर्याप्त संख्या में मवेशियों को रखने की व्यवस्था है? यदि है, तो बाजार में घूम रहे इन मवेशियों को वहां पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी है?

गौशाला संचालक और जिम्मेदार विभाग पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा मवेशियों की समस्या कोई नई समस्या नहीं है। इसके बावजूद अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है। लोगों का सवाल है कि गौशाला संचालक इन मवेशियों को पकड़कर गौशाला में रखने की दिशा में कब गंभीरता दिखाएंगे?

वहीं संबंधित पंचायत एवं प्रशासनिक अधिकारियों से भी लोग सवाल कर रहे हैं कि बाजार और मुख्य मार्गों पर लगातार घूम रहे मवेशियों को लेकर कोई ठोस कार्ययोजना क्यों नहीं बनाई जा रही है।

किसान, व्यापारी और राहगीर सभी परेशान

एक ओर किसान अपनी फसल को मवेशियों से बचाने के लिए परेशान हैं, दूसरी ओर बाजार के व्यापारी अपने सामान को लेकर चिंतित हैं और राहगीरों को सड़क पर बैठे मवेशियों के कारण दुर्घटना का डर बना रहता है। ऐसे में यह समस्या अब केवल आवारा मवेशियों की नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनती जा रही है।

                 अब कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों एवं व्यापारियों ने संबंधित प्रशासन से मांग की है कि केसवाही के मुख्य बाजार एवं प्रमुख मार्गों का निरीक्षण कर आवारा मवेशियों को पकड़कर गौशाला में रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि शासन द्वारा संचालित गौशाला में मवेशियों के लिए पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है या नहीं।

अब देखना यह होगा कि केसवाही बाजार में आवारा मवेशियों के जमघट से लोगों को कब निजात मिलती है और जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कब कार्रवाई करते हैं।

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