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गोहपारू–जैतपुर मुख्य मार्ग पर जानलेवा गड्ढे, भाटिया बुढार तिराहे के पास हर रोज बना रहता है हादसों का खतरा, विभाग मौन

 गोहपारू–जैतपुर मुख्य मार्ग पर जानलेवा गड्ढे, भाटिया बुढार तिराहे के पास हर रोज बना रहता है हादसों का खतरा, विभाग मौन


शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में बरसात का मौसम आते ही सड़कों की पोल खुलने लगती है। हालात ऐसे बन जाते हैं कि आमजन का घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। ताजा मामला जनपद पंचायत बुढार अंतर्गत ग्राम पंचायत भाटिया का है, जहां गोहपारू से जैतपुर को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों बदहाली की चरम स्थिति में पहुंच चुका है।

भाटिया बुढार तिराहे से जैतपुर की ओर जाने वाले इस प्रमुख मार्ग पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। बरसात के चलते इन गड्ढों में पानी भर जाने से यह पहचान पाना मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। ऐसे में दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक लगातार दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां आए दिन लोग फिसलकर गिरते हैं और कई बार गंभीर हादसे होते-होते बचते हैं।

स्थिति इतनी खराब है कि सड़क पर चलना किसी खतरे से कम नहीं रह गया है। गड्ढों में भरे पानी के कारण पूरी सड़क तालाब जैसी नजर आती है, जिससे राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर रात के समय यह मार्ग और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है, जब गड्ढे बिल्कुल दिखाई नहीं देते।

गौरतलब है कि यह मार्ग केवल ग्रामीणों के लिए ही नहीं बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसी रास्ते से होकर जैतपुर तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय सहित अन्य शासकीय दफ्तरों तक पहुंचा जाता है। जनप्रतिनिधि, अधिकारी और कर्मचारी भी इसी मार्ग से आवागमन करते हैं, इसके बावजूद सड़क की इस बदहाल स्थिति पर अब तक किसी का ध्यान नहीं गया है।

स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर खासा आक्रोश है। उनका कहना है कि कई बार जिम्मेदार विभाग को शिकायत की गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि केवल कागजों में सड़क निर्माण और मरम्मत के दावे किए जाते हैं, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।

यदि समय रहते इस सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। आमजन ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस मार्ग का निरीक्षण कर गड्ढों की मरम्मत और सड़क का पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके और दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कब संज्ञान लेते हैं, या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।

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