ग्राम पंचायत जमुनिहा का हाट बाजार बना गंदगी का अड्डा, बजबजा रही नालियां — स्वच्छता अभियान पर उठे सवाल
बताया जा रहा है कि इस हाट बाजार की वार्षिक बोली लगभग 4 से 5 लाख रुपए तक लगती है, और पूरे साल दुकानदारों से बाजार बैठकी के नाम पर वसूली भी की जाती है। इसके बावजूद बाजार में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव देखने को मिल रहा है। न तो नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था है और न ही नालियों की समय पर सफाई कराई जा रही है।
स्थानीय दुकानदारों का आरोप है कि उनसे शुल्क तो नियमित लिया जाता है, लेकिन बदले में कोई सुविधा नहीं दी जाती। गंदगी के बीच बैठकर दुकानदारी करना उनकी मजबूरी बन चुकी है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जहां कीचड़ और गंदे पानी के बीच लोगों को आना-जाना पड़ता है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
स्वच्छता अभियान सिर्फ कागजों में?
सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत जमुनिहा में साफ नजर आ रही है। जहां एक ओर स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर हाट बाजार की यह बदहाल तस्वीर इन दावों की पोल खोल रही है।
बड़ा सवाल:
क्या बाजार की बोली लगने के बाद ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?
या फिर वसूली के बावजूद सफाई और सुविधाओं पर ध्यान नहीं देना प्रशासनिक लापरवाही है?
ग्रामीणों और दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द हाट बाजार क्षेत्र में साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था की जाए, नालियों की नियमित सफाई हो और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कब तक ध्यान देते हैं, या फिर जमुनिहा का हाट बाजार यूं ही गंदगी में डूबा रहेगा।



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