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खैरहा में हजरत मकबूल शाह बाबा के उर्स का पहला कुल शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न आज दूसरे कुल पर सजेगा कव्वाली का भव्य मुकाबला

 खैरहा में हजरत मकबूल शाह बाबा के उर्स का पहला कुल शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न

आज दूसरे कुल पर सजेगा कव्वाली का भव्य मुकाबला


शहडोल। शहडोल जिले के ग्राम खैरहा में स्थित हजरत मकबूल शाह तलैया वाले बाबा का सालाना उर्स इस वर्ष भी पूरे अकीदत, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है। उर्स के अवसर पर पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना हुआ है और दरगाह परिसर में जायरीनों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

उर्स की शुरुआत 29 मई को अशरफ नगर खैरहा से चादरपोशी एवं संदल जुलूस के साथ हुई, जहां अकीदतमंदों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसके बाद दरगाह शरीफ में कुल की फातिहा अदा कर कार्यक्रम का विधिवत आगाज किया गया।

30 मई को उर्स का पहला कुल शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में जायरीन शामिल हुए। सुबह से ही दरगाह पर जियारत, फातिहा और दुआ का सिलसिला चलता रहा। लोगों ने बाबा की मजार पर चादर चढ़ाकर अपनी-अपनी मुरादें मांगीं। पूरे दिन क्षेत्र में धार्मिक और सूफियाना माहौल बना रहा।

रात होते ही महफिल-ए-कव्वाली का आयोजन किया गया, जिसने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। मशहूर कव्वाल जनाब गुलाम वारिस एवं शाहीन सबा भारती के बीच शानदार कव्वाली मुकाबला हुआ। दोनों ही कलाकारों ने अपने कलाम और अंदाज से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर रात तक चली इस महफिल में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और हर प्रस्तुति पर वाह वाह सुनाई देती रही

आज 31 मई को उर्स का दूसरा और मुख्य कुल बड़े ही शान-ओ-शौकत के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध कव्वाल रईस अनीस साबरी एवं शाहीन सबा भारती के बीच एक और जोरदार कव्वाली मुकाबला देखने को मिलेगा। आयोजन को लेकर क्षेत्र में खासा उत्साह है और बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

उर्स कमेटी खैरहा द्वारा आयोजन को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। दरगाह परिसर में साफ-सफाई, रोशनी, पानी एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। साथ ही सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

उर्स के दौरान क्षेत्र में मेले जैसा माहौल बना हुआ है, जहां खान-पान और अन्य दुकानों पर भी लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

यह उर्स न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि आपसी भाईचारे, कौमी एकता और हिंदू-मुस्लिम सौहार्द की एक जीवंत मिसाल भी है, जहां हर धर्म और वर्ग के लोग एक साथ मिलकर इस पावन आयोजन में शामिल होते हैं और प्रेम, शांति व एकता का संदेश देते हैं।

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