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शहंशाह-ए-खैरहा में 83 वां तीन दिवसीय उर्स शांतिपूर्ण व सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न

 शहंशाह-ए-खैरहा में 83 वां तीन दिवसीय उर्स शांतिपूर्ण व सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न






शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के ग्राम खैरहा स्थित हजरत मकबूल शाह बाबा के आस्ताने पर आयोजित 83वां तीन दिवसीय उर्स इस वर्ष भी पूरे धार्मिक उत्साह, आपसी भाईचारे और शांति के साथ संपन्न हुआ। हर साल की तरह इस बार भी उर्स में बड़ी संख्या में जायरीन शामिल हुए और बाबा की बारगाह में हाजिरी लगाकर दुआएं मांगीं।

उर्स की शुरुआत 29 मई 2026 को मगरिब की नमाज के बाद चादरपोशी और गुस्ल की रस्म के साथ हुई। 30 मई (शनिवार) को आयोजित कव्वाली कार्यक्रम में देश के मशहूर फनकार जनाब गुलाम वारिस और शाहीन सभा भारती के बीच शानदार मुकाबला हुआ, जिसने पूरी रात समां बांधे रखा। वहीं 31 मई (रविवार) को जनाब रहीस अनीश साबरी और शाहीन सभा भारती की दिलकश कव्वालियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

खैरहा का यह उर्स आज शहडोल संभाग में अपनी अलग पहचान बना चुका है। उर्स कमेटी के सदर जनाब मोहम्मद इरशाद अशरफी, उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद इम्तियाज, जनाब अख्तर साहब सहित सभी सदस्यों की एक महीने की कड़ी मेहनत रंग लाई और कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उर्स को लेकर पूरे क्षेत्र में पहले से ही उत्साह का माहौल बना हुआ था।

श्री अजीत शुक्ला हाई कोर्ट अधिवक्ता का उर्स की 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में गोल्डन जुबली कई कार्यक्रम मनाया गया

सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से थाना खैरहा का पूरा स्टाफ लगातार तीन दिनों तक मुस्तैद रहा और हर गतिविधि पर नजर बनाए रखी, जिससे कार्यक्रम बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हुआ।

उर्स के दौरान मैदान खचाखच भरा रहा और शहडोल जिले के अलावा अन्य जिलों व दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचे। कव्वाली कार्यक्रम में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसने इस आयोजन की लोकप्रियता को और भी बढ़ा दिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री जगन्नाथ शर्मा, पुष्पराजगढ़ क्षेत्र के कांग्रेस विधायक व उनके सहयोगी, उर्स कमेटी अध्यक्ष शेर खान (शेरू भाई), राशिद खान (कटनी), अखलाक खान, जनाब हिदायतुल्ला साहब न्यायाधीश इंदौर किसान नेता भूपेश शर्मा, कांग्रेस जिला अध्यक्ष अजय अवस्थी सहित जिले के कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने देर रात तक कव्वाली का आनंद लिया और आयोजन की सराहना की।

कुल मिलाकर, खैरहा का यह ऐतिहासिक उर्स एक बार फिर आपसी भाईचारे, संस्कृति और परंपरा की मिसाल बनकर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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