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शहडोल का महा-प्रशासनिक घोटाला: ट्रांसफर नीति को रमेंद्र सिंह ने दिखाया ठेंगा! जांच के बीच 'पैसे के बल' पर मुरैना से दोबारा शहडोल में करा ली 'मलाईदार' पोस्टिंग

 तबादला नीति के पैरा-३८ का सरेआम मर्डर; १ साल भी नहीं बीता और रसूख के दम पर लौटे कृषि सहायक संचालक; ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं में भारी आक्रोश, जांच प्रभावित होने का बड़ा खतरा!


शहडोल। मध्य प्रदेश शासन की ट्रांसफर नीति (तबादला नीति) केवल कागजों पर धूल फांकने के लिए है और रसूखदार अधिकारी अपनी जेब के दम पर जब चाहें, जहां चाहें ट्रांसफर करवा सकते हैं, इसका एक महा-सनसनीखेज मामला शहडोल में सामने आया है। शहडोल संभाग में पूर्व में पदस्थ रहे सहायक संचालक रमेंद्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने प्रशासनिक नियमों, सरकारी गाइडलाइंस और मर्यादाओं को ताक पर रखकर 'पैसे के बल' पर दोबारा शहडोल में उसी मलाईदार पद पर अपनी वापसी करा ली है। इस खुलेआम नियम-विरुद्ध पोस्टिंग के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

🛑 तबादला नीति के 'पैरा क्रमांक ३८' का सरेआम कत्ल!

मध्य प्रदेश शासन की स्पष्ट और वैधानिक ट्रांसफर नीति के पैरा क्रमांक ३८ में साफ तौर पर यह नियम दर्ज है कि:

"जिस भी अधिकारी का जिस जिले से एक बार स्थानांतरण (Transfer) कर दिया जाए, उसे पुनः उसी जिले में और उसी पद पर वापस नहीं भेजा जा सकता।"

लेकिन कृषि सहायक संचालक रमेंद्र सिंह के आगे सरकार के यह सारे नियम बौने साबित हो गए। गौर करने वाली बात यह है कि वर्ष २०२५ में ही रमेंद्र सिंह का ट्रांसफर शहडोल से मुरैना किया गया था। अभी मुरैना गए उन्हें ठीक से १ साल का समय भी नहीं बीता था कि उन्होंने पर्दे के पीछे से भारी रसूख और धनबल का इस्तेमाल करते हुए पुनः शहडोल में उसी पद पर अपना ट्रांसफर आर्डर जारी करवा लिया।

⚖️ शहडोल में चल रही है गंभीर जांच, रमेंद्र सिंह की वापसी से 'सबूतों का मर्डर' तय!

इस ट्रांसफर के पीछे केवल नियमों का उल्लंघन ही नहीं है, बल्कि एक बहुत बड़ी प्रशासनिक साजिश की बू आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, कृषि सहायक संचालक रमेंद्र सिंह के विरुद्ध शहडोल में पूर्व से ही गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच चल रही है।

जांच प्रभावित होने का महा-खतरा: नियम कहते हैं कि जिस अधिकारी के खिलाफ जांच चल रही हो, उसे उस क्षेत्र से कोसों दूर रखा जाए ताकि वह साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित न कर सके।

बिल्ली को ही मलाई की रखवाली: अब जब रमेंद्र सिंह स्वयं शहडोल आकर उसी मुख्य कुर्सी पर बैठ गए हैं, तो उनके मातहत काम करने वाले कर्मचारी उनके खिलाफ गवाही देने की हिम्मत कैसे करेंगे? इस वापसी से साफ है कि शिकायत पर चल रही निष्पक्ष जांच को पूरी तरह प्रभावित करने और फाइलों को दबाने का खेल शुरू हो चुका है।

✊ प्रबुद्ध नागरिकों और शिकायतकर्ताओं की मांग: तत्काल मुरैना वापस भेजे जाएं रमेंद्र सिंह

इस महा-उल्लंघन को लेकर अब शहडोल संभाग के जागरूक नागरिकों और शिकायतकर्ताओं ने सीधे शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्रियों से लिखित आग्रह किया जा रहा है कि रमेंद्र सिंह के इस नियम-विरुद्ध ट्रांसफर को तत्काल निरस्त (Cancel) किया जाए। उन्हें शहडोल से हटाकर वापस मुरैना में ही पदस्थ रखा जाए, ताकि उनके खिलाफ की गई शिकायतों की जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ बिना किसी दबाव के आसानी से पूरी हो सके।

🚨 'मीडिया' के तीखे और सीधे सवाल:

सवाल १: वल्लभ भवन (भोपाल) में बैठे उन आकाओं ने आखिर किस 'चमत्कारी मलाई' के बदले ट्रांसफर नीति के पैरा क्रमांक ३८ की धज्जियां उड़ाते हुए रमेंद्र सिंह का ट्रांसफर आर्डर साइन कर दिया?

सवाल २: जब एक दागी अधिकारी के खिलाफ जिले में पहले से जांच लंबित है, तो उसे दोबारा उसी जिले का 'मालिक' बनाकर क्यों भेजा गया? क्या प्रशासन खुद भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहा है?

सवाल ३: क्या शहडोल कमिश्नर और जिला प्रशासन इस गंभीर नीतिगत उल्लंघन का संज्ञान लेकर शासन को रमेंद्र सिंह को कार्यमुक्त करने की रिपोर्ट भेजेंगे, या रसूख के आगे घुटने टेक दिए जाएंगे?

हम इस प्रशासनिक साठगांठ और ट्रांसफर स्कैंडल की एक-एक फाइल को उजागर करते रहेंगे। जब तक नीति का पालन नहीं होता और जांच निष्पक्ष नहीं होती, हमारी बेबाक आवाज बंद नहीं होगी।

 ब्यूरो रिपोर्ट। प्रशासनिक शुचिता के पक्ष में इस खबर को आग की तरह शेयर करें ताकि भोपाल में बैठे आला अधिकारियों की नींद टूटे और इस अवैध ट्रांसफर पर तुरंत रोक लगे!

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