शिक्षक विदाई समारोह भावुक माहौल में संपन्न, सम्मान के साथ दी गई विदाई
शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के जन शिक्षा केंद्र बुढार अंतर्गत संकुल केशवाही विद्यालय में आज एक भावुक एवं गरिमामय वातावरण में वरिष्ठ शिक्षक श्री नारायण सिंह पावेल के सम्मान में भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संकुल के सभी शिक्षक, शिक्षाकर्मी एवं गणमान्यजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। समारोह में संकुल प्राचार्य श्री कामता प्रसाद सूर्यवंशी, सीएसी श्री मयंक सिंह, भूपत सर, के.के. सर, धनौरा विद्यालय के शिक्षक श्री हजारी लाल जी सहित संकुल के समस्त शिक्षकों की उपस्थिति में श्री नारायण सिंह पावेल को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल भावुक एवं गमगीन बना रहा।
विदाई समारोह में वक्ताओं ने अपने संबोधन में श्री पावेल के लंबे सेवाकाल, उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली, अनुशासनप्रियता एवं छात्रों के प्रति उनके समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा की। संकुल प्राचार्य श्री कामता प्रसाद सूर्यवंशी ने कहा कि “ऐसे शिक्षक किसी भी संस्थान की अमूल्य धरोहर होते हैं, जो अपने ज्ञान, अनुभव और संस्कारों से कई पीढ़ियों को मार्गदर्शन देते हैं। उनकी कमी विद्यालय परिवार को हमेशा महसूस होगी।”
संकुल के समस्त शिक्षकों ने भी अपने प्रिय सहकर्मी के साथ बिताए गए यादगार पलों को साझा करते हुए भावुक शब्दों में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान कई शिक्षकों की आंखें नम हो गईं, जिससे कार्यक्रम का वातावरण और अधिक भावुक हो गया। शिक्षकों एवं स्टाफ द्वारा श्री पावेल को पुष्पमाला, शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षकों एवं छात्रों ने गीत, कविता एवं अन्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने प्रिय शिक्षक के प्रति सम्मान प्रकट किया।
अपने विदाई संबोधन में श्री नारायण सिंह पावेल ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “विद्यालय मेरे लिए एक परिवार की तरह रहा है। यहां बिताया गया हर क्षण मेरे जीवन की अमूल्य धरोहर है। मैं सदैव अपने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता रहूंगा।”
कार्यक्रम का सफल संचालन विद्यालय परिवार द्वारा किया गया तथा अंत में सभी ने श्री पावेल के स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की कामना करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी।



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