गोपाल गौशाला का सीईओ ने किया निरीक्षण
बरसात में जलभराव और साफ-सफाई को लेकर प्रबंधन समिति को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
केसवाही। जनपद पंचायत बुढ़ार के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने 4 सितंबर 2026 को ग्राम केसवाही स्थित गोपाल गौशाला भवन का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान गौशाला परिसर में मौजूद गौवंश की सेवा, सुरक्षा, साफ-सफाई तथा बरसात के मौसम में होने वाले जलभराव की स्थिति को लेकर प्रबंधन समिति को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
सीईओ ने प्रबंधन समिति को निर्देशित किया कि बारिश के दौरान गौशाला परिसर में जलभराव के कारण गंदगी और अस्वच्छता की स्थिति उत्पन्न न हो। परिसर में नियमित साफ-सफाई रखने के साथ ही गौवंश के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने गौवंश की सेवा और देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने पर भी जोर दिया।
जन्माष्टमी पर गौ माता की पूजा-अर्चना
गोपाल गौशाला केसवाही में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर गौ माता को केला एवं गुड़ खिलाकर पूजा-अर्चना भी की गई। इस अवसर पर प्रबंधन समिति के सदस्य, गौ सेवक, पशु चिकित्सक सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान गौ सेवा एवं गौ संरक्षण का संकल्प लेते हुए गौ माता की सेवा निरंतर जारी रखने की बात कही गई।
बीमार और घायल गौवंश का नियमित उपचार
गौशाला परिसर में घायल एवं बीमार गौवंश के उपचार की व्यवस्था भी की जा रही है। पशु चिकित्सक द्वारा समय-समय पर गौशाला पहुंचकर बीमार और घायल गौवंश का उपचार किया जाता है, जबकि प्रबंधन समिति द्वारा उनके खान-पान, सेवा और देखभाल की व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी द्वारा भी समय-समय पर गौशाला का निरीक्षण किया जाता है तथा उच्च अधिकारियों का मार्गदर्शन प्राप्त होता रहता है।
जैविक खाद और गौकाष्ठ उत्पादन से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
निरीक्षण के दौरान गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी सुझाव दिए गए। गौशाला में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए जैविक खाद, गौकाष्ठ सहित अन्य गौ-आधारित उत्पादों का निर्माण करने की दिशा में काम करने का सुझाव दिया गया, ताकि गौशाला अपनी आय के कुछ स्रोत विकसित कर सके और भविष्य में व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से संचालित किया जा सके।
बरसात में बढ़ती गौवंश संख्या बनी चुनौती
बरसात के मौसम में ग्राम पंचायत क्षेत्र में गौवंश की संख्या बढ़ने से किसानों के सामने फसल नुकसान की समस्या भी सामने आती है। वहीं गौशाला की क्षमता सीमित होने के कारण क्षमता से अधिक गौवंश को वहां रखना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में कई गौवंश सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर घूमते नजर आते हैं और उनके लिए उचित आश्रय उपलब्ध नहीं हो पाता।
स्थानीय स्तर पर यह भी चिंता सामने आई कि सड़क पर घूमने वाले कई गौवंश वास्तव में किसी न किसी पशुपालक या किसान के पालतू पशु हैं, जिन्हें उनके मालिकों द्वारा उचित देखभाल न करते हुए निराश्रित छोड़ दिया जाता है। इससे जहां किसानों की फसलों को नुकसान होता है, वहीं सड़क पर घूमने वाले पशुओं के कारण दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
इस समस्या की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बुढ़ार द्वारा प्रस्ताव के माध्यम से गौशाला में अतिरिक्त शेड निर्माण कराए जाने की बात कही गई है। अतिरिक्त शेड बनने से गौशाला की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है, जिससे बरसात के दौरान निराश्रित गौवंश को आश्रय देने में मदद मिल सकेगी।
गौ सेवा के साथ व्यवस्था सुधारने की पहल
निरीक्षण के दौरान गौशाला में स्वच्छता, गौवंश की नियमित चिकित्सा, बेहतर प्रबंधन, जलभराव से बचाव और अतिरिक्त शेड की आवश्यकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। अधिकारियों के मार्गदर्शन और प्रबंधन समिति की सक्रियता से गौशाला को अधिक व्यवस्थित एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किए जाने पर जोर दिया गया।


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