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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी केसवाही की पानी टंकी! छज्जा गिरते ही खुली निर्माण की पोल, जिम्मेदारों पर उठे सवाल

 भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी केसवाही की पानी टंकी! छज्जा गिरते ही खुली निर्माण की पोल, जिम्मेदारों पर उठे सवाल



जनपद पंचायत बुढार अंतर्गत ग्राम पंचायत केसवाही में बन रही पानी की टंकी अब भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण बनती नजर आ रही है। ग्रामीणों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस निर्माण कार्य में शुरुआत से ही भारी अनियमितताएं बरती गईं, जिसका नतीजा अब सामने आ चुका है।


बताया जा रहा है कि टंकी निर्माण के लिए सबसे पहले जमीन के अंदर गड्ढा खोदा गया, लेकिन यह गड्ढा निर्धारित मानकों के अनुसार कितना गहरा और मजबूत बनाया गया, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके बाद जल्दबाजी में ढलाई कर ऊपर एक कमरा (रूम) तैयार कर दिया गया। निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर तब बड़ा सवाल खड़ा हो गया जब इस कमरे का छज्जा अचानक भरभराकर गिर पड़ा।


छज्जा गिरा, जिम्मेदार बने मूकदर्शक

सबसे हैरानी की बात यह है कि छज्जा गिरने के बाद भी ठेकेदार द्वारा इसे दोबारा ठीक कराने की कोई पहल नहीं की गई। इससे साफ जाहिर होता है कि निर्माण कार्य में किस स्तर की लापरवाही और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर अभी से यह हाल है, तो भविष्य में पूरी टंकी की मजबूती पर सवाल उठना लाजमी है।


कमीशनखोरी का खेल?

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत द्वारा ठेकेदारों को काम तो दे दिया जाता है, लेकिन निर्माण कार्य की निगरानी पूरी तरह से नजरअंदाज कर दी जाती है। आरोप यह भी है कि कमीशन के चक्कर में जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी साइट पर जाकर गुणवत्ता जांच तक नहीं करते। ठेकेदार मनमानी तरीके से घटिया सामग्री—चाहे वह सीमेंट हो या रेत—का उपयोग कर रहे हैं, जिससे सरकारी धन का खुला दुरुपयोग हो रहा है।


इंजीनियर-ठेकेदार की मिलीभगत के संकेत

स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि इस पूरे मामले में इंजीनियर और ठेकेदार की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। बिना तकनीकी स्वीकृति और गुणवत्ता जांच के इस तरह का निर्माण कार्य होना कई सवाल खड़े करता है।


जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता की उच्च स्तरीय जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।


अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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