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नौजवान मोहर्रम कमेटी केसवाही का सराहनीय पहल: मोहर्रम की दसवीं पर रोजा इफ्तार कार्यक्रम, इमाम हुसैन की याद में गम और इंसानियत का पैगाम

नौजवान मोहर्रम कमेटी केसवाही का सराहनीय पहल: मोहर्रम की दसवीं पर रोजा इफ्तार कार्यक्रम, इमाम हुसैन की याद में गम और इंसानियत का पैगाम

शहडोल, 26 जून 2026 — पूरे देश में मोहर्रम का पवित्र महीना अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के केसवाही नगर में भी हर साल की तरह इस वर्ष नौजवान मोहर्रम कमेटी द्वारा धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ किया जा रहा है।


जानकारी के अनुसार, मोहर्रम की दसवीं तारीख (आशूरा) के मौके पर केसवाही स्थित इमामबाड़ा में रोजा इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में नगर सहित आसपास के क्षेत्रों के मुस्लिम समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल होकर नमाज-ए-मगरिब के बाद सामूहिक रूप से रोजा इफ्तार करेंगे। आयोजन का उद्देश्य भाईचारा, एकता और इंसानियत का संदेश देना है।


गौरतलब है कि एक मोहर्रम से लेकर नौ मोहर्रम तक इमामबाड़ा केसवाही में जिक्र-ए-शोहदाए कर्बला का सिलसिला जारी रहा, जिसमें दूर-दराज से आए उलमा-ए-किराम ने अपने बयान से माहौल को गमगीन और रूहानी बना दिया। इस दौरान अल्लामा मौलाना मुफ्ती आसिफ कमाल साहब (रामपुर-बरेली) एवं शायरे इस्लाम जनाब सैफुल्लाह सुल्तानी संभाली ने इमाम हुसैन (र.अ.) की शहादत, सब्र और कुर्बानी पर रोशनी डालते हुए हाजिरीन को भावुक कर दिया। उनके बयानों के दौरान इमाम हुसैन की याद में लोगों की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल गम में डूबा नजर आया।


मोहर्रम की दसवीं तारीख को आयोजित हो रहा यह रोजा इफ्तार कार्यक्रम न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता, भाईचारे और आपसी सहयोग को भी मजबूत करता है।


इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में नौजवान मोहर्रम कमेटी के सदस्य बढ़-चढ़कर योगदान दे रहे हैं। प्रमुख रूप से जनाब मोहम्मद कलाम, मोहम्मद मोनिश, मोहम्मद नाहिल, साहिल, अरबाज, मोहम्मद जुबेर, आशु, तालिब, मोनी, मोहम्मद ताज, मोहम्मद अरमान, मोहम्मद तोहिद सहित समस्त नौजवान कमेटी के सदस्य दिन-रात मेहनत कर कार्यक्रम को भव्य और सफल बनाने में जुटे हुए हैं।


स्थानीय लोगों ने नौजवान कमेटी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के धार्मिक और सामाजिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और नई पीढ़ी को अपने धर्म और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।


कार्यक्रम के अंत में मुल्क की तरक्की, अमन-चैन और खुशहाली के लिए दुआएं भी की जाएंगी।



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